महाभारत में वर्णित द्रौपदी की मनोदशा का विश्लेषणात्मक अध्ययन
DOI:
https://doi.org/10.8224/journaloi.v73i4.730Abstract
महाभारत न केवल एक ऐतिहासिक महाकाव्य है, अपितु यह भारतीय संस्कृति, समाज, मनोविज्ञान एवं नैतिकता का गहन दर्पण भी है। इसमें वर्णित द्रौपदी-वीरांगना, विदुषी, धर्मनिष्ठा और प्रतिशोध की अग्नि-भारतीय नारी की संघर्षशील चेतना एवं आत्मबल का प्रतीक हैं। इस अध्ययन का उद्देश्य द्रौपदी की मनोदशा को सामाजिक, पारिवारिक, राजनीतिक, धार्मिक एवं मानसिक - दृष्टिकोण से बहुआयामी रूप में उजागर करना है।
महाभारत की नायिका द्रौपदी नारी शक्ति, आत्मसम्मान, धर्मनिष्ठा और प्रतिशोध की जीवंत प्रतिमूर्ति हैं। प्रस्तुत शोध में द्रौपदी की मनोदशा का विश्लेषण महाभारत के विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से किया गया है। चीर-हरण प्रसंग में उनका साहस, धर्म पर अडिग विश्वास और अपमान के विरुद्ध प्रतिरोध की भावना स्पष्ट रूप से प्रकट होती है। उनके विचार और संवाद न केवल स्त्री की गरिमा के लिए संघर्ष को दर्शाते हैं, बल्कि उस युग के सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक मूल्यों को भी उजागर करते हैं।