डिजिटल युग में जम्मू-कश्मीर की पारंपरिक संगीत परंपराएँः सूफियाना मौसिकी और डोगरी लोक संगीत का तुलनात्मक अध्ययन

लेखक

  • निर्मला काक , डॉ. प्रतिभा शर्मा

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https://doi.org/10.8224/journaloi.v75i1.1090

सार

जम्मू और कश्मीर की सांस्कृतिक पहचान उसकी समृद्ध संगीत परंपराओं से निर्मित होती है। विशेष रूप से सूफियाना मौसिकी तथा डोगरी लोक संगीत इस क्षेत्र की प्रमुख संगीत शैलियाँ हैं। कश्मीर घाटी का सूफी संगीत आध्यात्मिकता को और जम्मू क्षेत्र का डोगरी संगीत यहाँ की डुग्नगर शैली को प्रतिबिंबित करता हैं।, सूफियाना मौसिकी, जो 15वीं शताब्दी में फारसी, मध्य एशियाई और भारतीय संगीतिक तत्वों के समन्वय से विकसित हुई, इसमें संतूर, साज़-ए-कश्मीर और वोकल परफॉर्मेंस प्रमुख हैं, जो सूफी कविताओं (कश्मीरी, फारसी और उर्दू) के माध्यम से दिव्य प्रेम और आध्यात्मिक एकता का संदेश देती है। वहीं, डोगरी लोक संगीत मुख्यतः मौखिक परंपरा पर आधारित है, जिसमें भावपूर्ण लोकगीत (जैसे भाख, करक, बिहाई और घोड़ी), नृत्य और लोक वाद्य (ढोलक, नगाड़ा आदि) शामिल हैं। यह प्रकृति, प्रेम, वीरता और सामाजिक जीवन की भावनाओं को जीवंत रूप से व्यक्त करता है।

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प्रकाशित

2026-05-22

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निर्मला काक , डॉ. प्रतिभा शर्मा. (2026). डिजिटल युग में जम्मू-कश्मीर की पारंपरिक संगीत परंपराएँः सूफियाना मौसिकी और डोगरी लोक संगीत का तुलनात्मक अध्ययन. Journal of the Oriental Institute, ISSN:0030-5324 UGC CARE Group 1, 75(1), 284–299. https://doi.org/10.8224/journaloi.v75i1.1090

अंक

खंड

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