1937 का चुनाव, मुस्लिम लीग व भारत का विभाजन

लेखक

  • राजेश रांझा

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https://doi.org/10.8224/journaloi.v73i4.1060

सार

1937 ई के विधानसभा चुनाव का भारतीय इतिहास में बहुत अधिक प्रभाव रहा। ब्रिटिश सरकार के दिखावे के संवैधानिक सुधारों द्वारा पहली बार विधानसभा में बड़े दल के नेता को प्रांत का मुख्यमंत्री बनाए जाने की वकालत की गई और साथ ही संवैधानिक शक्तियों का अंतिम अधिकार प्रांत के गवर्नर को दे दिया गया। ब्रिटिश सरकार की दोहरी प्रशासनिक नीति का उद्देश्य केवल एक ही था कि भारतीयों को प्रशासन में भागीदारी देकर उनका समर्थन प्राप्त करना व भारत में लंबे समय तक राज करना। समय के साथ-साथ अनेक अधिनियमों के माध्यम से भारतीयों की प्रशासन में भागीदारी बढ़ाई गई थी।1935 के अधिनियम के अंतर्गत भारत में राजनीतिक पार्टियों को महत्व दिया गया। इस अधिनियम के अनुसार जो पार्टी प्रांतीय विधानसभा में बहुमत के साथ आएगी वह अपना मुख्यमंत्री एवं सरकार बनाएगी। ब्रिटिश सरकार के इस कदम से भारतीय राष्ट्रीयता को आघात पहुंचाने का कार्य किया। इस अधिनियम के बाद देश में अनेक राजनीतिक पार्टियों का गठन हुआ और उनमें अधिक से अधिक राज्यों में सरकार बनाने के लिए प्रतिद्वंता बढ़ने लगी।

 

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प्रकाशित

2026-04-06

अंक

खंड

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